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शालू दुग्गल  द्वारा लिखित मानसिक स्वास्थ्य और समाज पर दिल्ली प्रेस पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों का संकलन

👉 “A Collection of Articles on Mental Health and Society Written by Shallu Duggal, Published in Delhi Press Magazines”

Hindi Family Story : पड़ोसिन – पति की बात सुनकर सुधा क्यों घबराई ?

Hindi Family Story : सीमा मिलनसार थी पर उस का व्यवहार कालोनी की औरतों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ था. फिर ऐसा क्या हुआ कि सीमा सुधा की सब से प्यारी पड़ोसिन बन गई...

Saas-Bahu Relations: जब सास रिच और पब्लिक फिगर हो

सास अगर आकाश है तो बहू को जमीन बनना है- लेकिन यह जमीन भी मजबूत होनी चाहिए, जिसे कोई रौंद न सके.

Hindi Moral Tales : रिश्ता

शारदा अपनी बहू रीता को बहुत चाहती थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि उस के मन से अपनी बहू के प्रति प्यार खत्म ही हो गया.

पेरेंटिंग और बचपन के मानसिक विकास पर समर्पित एक विशेष लेख, जो बच्चों की भावनाओं को समझने और उनके बेहतर व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।

Women : महिलाओं की पहचान काबिलीयत है परंपराएं नहीं

सिंदूर और मंगलसूत्र के नाम पर वर्षों से महिलाओं को यह याद दिलाया जाता रहा है कि उन की पहचान उन के पति से जुड़ी हुई है. यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक नियंत्रण का तरीका भी है...

खामोशी: नेहा अपनी शादीशुदा जिंदगी को संभाल पाई

नेहा एक अतिमहत्त्वाकांक्षी युवती थी. शादी बाद जब वह ससुराल आई तो पति से न सिर्फ भरपूर प्यार मिला, धनदौलत भी भरपूर मिली. मगर सिवाय उसे सहेजने के, वह खुल कर पैसा उड़ाने लगी...

Family Story in Hindi: एक गलत सोच – बहू सुमि के आने से क्यों परेशान थी सरला

घर में बहू सुमि के आने से सरला का काम और बढ़ गया था. सुमि ने न घर की जिम्मेदारी संभाली न ही अपने पति की. क्या बहू के रूप में सुमि का चुनाव कर के सरला ने गलती की थी?

Hindi short story : एक बैग की कीमत

प्यार, लालच और डर लालच और उतावलापन कभीकभी बड़ी कीमत वसूलती है. अंजलि के साथ भी यही हुआ....

Kahani : पाखंड – आखिर क्या जान गई थी बहू?

भारी मन से ही सही पर बेटे की खातिर मैं माताजी के झांसे में फंस खुद को माफ नहीं कर पाती यदि रामकली और माताजी के संवाद मेरे कानों में न पड़ते.

Women Empowerment: लड़की हूं पर कमजोर नहीं

जब तक महिलाएं अपने भीतर की शक्ति को नहीं पहचान पाएंगी तब तक पुरुष अपने आंसुओं से खुद को दूर रखेंगे...

Andhvishwas Ki Kahani: ग्रहों की शांति

पंडित की बातों पर रामचरणजी आंख मूंद कर विश्वास करते थे. मगर एक दिन जब छोटी बहू ने सचाई से रूबरू कराया तो उन की आंखें खुली की खुली रह गईं.

शालू दुग्गल  द्वारा लिखित मानसिक स्वास्थ्य और समाज पर दिल्ली प्रेस पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों का संकलन

👉 “A Collection of Articles on Mental Health and Society Written by Shallu Duggal, Published in Delhi Press Magazines”

Hindi Family Story : पड़ोसिन – पति की बात सुनकर सुधा क्यों घबराई ?

Hindi Family Story : सीमा मिलनसार थी पर उस का व्यवहार कालोनी की औरतों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ था. फिर ऐसा क्या हुआ कि सीमा सुधा की सब से प्यारी पड़ोसिन बन गई...

Saas-Bahu Relations: जब सास रिच और पब्लिक फिगर हो

सास अगर आकाश है तो बहू को जमीन बनना है- लेकिन यह जमीन भी मजबूत होनी चाहिए, जिसे कोई रौंद न सके.

पेरेंटिंग और बचपन के मानसिक विकास पर समर्पित एक विशेष लेख, जो बच्चों की भावनाओं को समझने और उनके बेहतर व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।

Women : महिलाओं की पहचान काबिलीयत है परंपराएं नहीं

सिंदूर और मंगलसूत्र के नाम पर वर्षों से महिलाओं को यह याद दिलाया जाता रहा है कि उन की पहचान उन के पति से जुड़ी हुई है. यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक नियंत्रण का तरीका भी है...

खामोशी: नेहा अपनी शादीशुदा जिंदगी को संभाल पाई

नेहा एक अतिमहत्त्वाकांक्षी युवती थी. शादी बाद जब वह ससुराल आई तो पति से न सिर्फ भरपूर प्यार मिला, धनदौलत भी भरपूर मिली. मगर सिवाय उसे सहेजने के, वह खुल कर पैसा उड़ाने लगी...

Hindi short story : एक बैग की कीमत

प्यार, लालच और डर लालच और उतावलापन कभीकभी बड़ी कीमत वसूलती है. अंजलि के साथ भी यही हुआ....

Kahani : पाखंड – आखिर क्या जान गई थी बहू?

भारी मन से ही सही पर बेटे की खातिर मैं माताजी के झांसे में फंस खुद को माफ नहीं कर पाती यदि रामकली और माताजी के संवाद मेरे कानों में न पड़ते.

Women Empowerment: लड़की हूं पर कमजोर नहीं

जब तक महिलाएं अपने भीतर की शक्ति को नहीं पहचान पाएंगी तब तक पुरुष अपने आंसुओं से खुद को दूर रखेंगे...

विशेष चर्चा 

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