क्या सच में Teenagers की Life की Villain उनकी माँ होती है?
- Duggal Shallu
- May 4
- 2 min read
“मम्मी मेरी life खराब कर रही हैं…”15 साल की आर्या गुस्से में ये बोलकर अपने कमरे का दरवाज़ा पटक देती है।
बाहर खड़ी माँ—चुप।आँखों में गुस्सा नहीं… थकान और उलझन है।
क्या वाकई आज के teenagers की नज़र में “माँ” villain बन चुकी है?या ये सिर्फ एक emotional perception है, जिसका असली कारण कुछ और है?
Teenage: जब बच्चा नहीं, पर पूरा बड़ा भी नहीं

Teenage एक ऐसा phase है जहाँ:
Identity बन रही होती है
Independence की चाह बढ़ रही होती है
Emotions अपने peak पर होते हैं
और इसी समय…सबसे ज्यादा टकराव होता है माँ के साथ।
क्यों?
क्योंकि माँ ही वो इंसान है जो:
सबसे ज्यादा involved होती है
हर बदलाव को notice करती है
और control छोड़ने में सबसे ज्यादा struggle करती है
“Villain” बनने के पीछे की असली वजहें
1. Over-Protection vs Independence
माँ के लिए बच्चा हमेशा बच्चा ही रहता है,लेकिन teenager के लिए—“मुझे space चाहिए।”
जब माँ बार-बार पूछती हैं:“कहाँ जा रहे हो?”“किससे बात कर रहे हो?”
तो बच्चे को लगता है:“मुझ पर भरोसा नहीं है।”
2. Communication Gap
माँ advice देती हैं…Teenager सुनना नहीं चाहता।
Teenager share करना चाहता है…माँ judgement दे देती हैं।
नतीजा?दोनों अपनी-अपनी जगह सही होते हैं,लेकिन connection टूट जाता है।
3. Comparison और Expectations
“शर्मा जी का बेटा…”“तुमसे कुछ नहीं होगा…”
ये सिर्फ शब्द नहीं होते—ये बच्चे की self-worth को चोट पहुँचाते हैं।
धीरे-धीरे बच्चा मानने लगता है:“मैं enough नहीं हूँ।”
और जो हमें hurt करता है…वही हमें “villain” लगता है।
4. Emotional Expression का फर्क
माँ का प्यार अक्सर दिखता है:
चिंता में
डांट में
नियंत्रण में
लेकिन teenager चाहता है:
समझ
सुनना
acceptance
जब expression mismatch होता है,तो प्यार भी pressure लगने लगता है।
Psychological Truth
Teenagers अपनी माँ को इसलिए villain नहीं मानते क्योंकि वो उनसे नफरत करते हैं…
बल्कि इसलिए क्योंकि:वो उनसे सबसे ज्यादा emotionally connected होते हैं।
जहाँ connection गहरा होता है,वहीं hurt भी गहरा होता है।
एक छोटी सी कहानी
17 साल का रोहन counselling में आया और बोला:“मुझे अपनी माँ से बहुत irritation होती है…”
Session के अंत में उसने कहा:“पर अगर मैं सबसे ज्यादा miss करूँगा, तो वो मेरी माँ ही होंगी…”
यही contradiction teenage की सच्चाई है—Love भी वही, frustration भी वही।
तो क्या माँ सच में Villain है?
नहीं।
माँ villain नहीं है…वो भी एक इंसान है जो parenting सीख रही है।
और teenager?वो भी खुद को समझने की कोशिश कर रहा है।
असल में यह “villain की कहानी” नहीं…misunderstanding की कहानी है।
क्या बदलने की जरूरत है?
Parents के लिए:
हर बात पर control नहीं, connection बनाइए
सुनना सीखिए—बिना बीच में टोके
हर गलती पर lecture नहीं, support दीजिए
कभी-कभी बस इतना कह दीजिए:“मैं तुम्हें समझने की कोशिश कर रही हूँ”
Teenagers के लिए:
माँ perfect नहीं हैं, लेकिन उनका intent गलत नहीं होता
अपनी feelings को express करना सीखें
हर बात rebellion से नहीं, communication से solve होती है
Final Thought (Counselor Perspective)
एक काउंसलर होने के नाते मैं यह कहना चाहूँगी—
“Teenagers की life में माँ villain नहीं होती,वो अक्सर unheard hero होती हैं…”
फर्क सिर्फ इतना है कि:एक समझाना चाहती है,और एक समझा जाना चाहता है।
और जब ये दोनों एक-दूसरे को सुनना शुरू कर देते हैं—तभी रिश्ता सच में खूबसूरत बनता है।
— Shallu DuggalHuman Behaviour Counselor & Writer



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